Trounce Days
Thursday, December 2, 2010
6 july 2010 को
एक और मन्जिल मिली.....
जब सुबह 5 बजे,
Trounce के लिये आँख खुली......
enquiry में मैडम ने,
couldnt का pronunciation बताया था....
इन्हीं कुछ बातों से,
उन्होंने हमको बहलाया था....
जब पहले दिन attend करी,
group discussion कि class,
सोचा, ना जाने क्युँ,
कर रहे हैं ये इतनी बक्वास....
conversation room में,
क्युँ हम लड़ते झगड़ते हैं....
जब आखिर में,
मैड्म के decision पर depend करते हैं...
अब क्या बतऊँ कैसे,
theory class से विश्वास छुटा.....
15 मिन्ट के चक्कर ने
कैसे हमको हर बार लुटा....
पर फ़िर भी trounce में,
एक अच्छा environment पाया....
इसी trounce ने ही,
कितने दोस्तों से मिलाया....
कभी presentation कभी fate,
तोह कभी organise होता debate.....
पड़ती थी हमको डाँट अक्सर,
क्युँ की रोज हम होते लेट......
आ गया विदायी का दिन,
अब हमको पड़ेगा जाना....
बस यही गुजारीश है,
student समझकर हमको भुल ना जाना....
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